Om Prakash Nautiyal

Author's details

Name: Om Prakash Nautiyal
Date registered: August 14, 2012
URL: http://opnautiyal.blogspot.com/

Biography

I am Om Prakash Nautiyal born and brought up in Dehra Dun . I did my M.Sc(Physics) follwed subsequently by M.Sc (Maths) and MBA. I made my exit from ONGC in 2006 as General Manager (Electronics and Telecommunication) and settled in Vadodara with my family which includes my wife Archna and son Anubhav. I enjoy devoting my time in consutancy ,teaching Maths and Science, persuing & participating in academic & literary activities ,writing poems , articles and engaging myself in other miscellaneous activities of interest and social relevance . Published Book : Saans Saans Jeevan – a compilation of my popular Hindi poems Chief Editor :Uttara Quarterly Hindi Magazine . ompnautiyal@yahoo.com ompnautiyal@rediffmail.com.

Latest posts

  1. क्यों फटा रे बादल तू — September 23, 2012
  2. उत्तराखण्ड की याद में -ओंम प्रकाश नौटियाल — August 20, 2012
  3. पहाड़ों की दाल — August 19, 2012
  4. अब गाँव कहाँ है?? — August 18, 2012
  5. पहाडों से दूर… — August 17, 2012

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  1. उत्तराखण्ड की याद में -ओंम प्रकाश नौटियाल — 1 comment

Author's posts listings

Sep
23

क्यों फटा रे बादल तू

-ओंम प्रकाश नौटियाल (केदार घाटी में बादल फटने की त्रासदी पर) मैं , पर्वत , पूछता हूं तुझसे ऐ बादल ! कारण मित्राघात का ! तुझे मैंने वास दिया, बैठाया अपने शीर्ष पर गोद में खिलाया अपनी घाटियों की , शुद्ध शीतल पवन से पखारा अपनी सुरम्य वादियों की, तेरे तन का श्रंगार किया अपने …

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Aug
20

उत्तराखण्ड की याद में -ओंम प्रकाश नौटियाल

– मेरी धरती तुझसे जो मिला, जब उस दुलार की बातें होंगी, तेरी अप्रतिम छ्टा, सौन्दर्य , अद्‍भुत शान की बातें होंगी । – तेरी घाटियों के घुमाव, निर्मल नदियों के बहाव, सुन्दर वादियों, पगडंडियों की, चढ़ाई , ढलान की बातें होंगी। – तेरे खेत, बाग, वन,घाटियाँ, ताल , नदियाँ, वादियाँ सभी दिलकश नजारों की, …

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Aug
19

पहाड़ों की दाल

Photo Courtesy: Ghughuti Basuti on Facebook

कक्षा सात विज्ञान परीक्षा में,यह पूछा गया सवाल, पहाडों पर लम्बे समय तक क्यों नही गलती दाल? क्या हैं कारण इसके बच्चों, विस्तार से समझाना, आखिर क्यों इतना मुश्किल है, दाल वहाँ गलाना ? अनुभव का जो उत्तर था, वह लगा एकदम सच्चा, सीधे तथ्यों से परिपूर्ण,जिनसे वाकिफ़ बच्चा बच्चा, लिखा,पहाडों पर स्त्रियाँ करती, बाहर …

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Aug
18

अब गाँव कहाँ है??

Where-are-the-villages

ताल सूखे, बाग उजडे हो गई खेती हवा है गाँव में बचा मेरे अब गाँव कहाँ है ? बेइंतहा भीड है हर जगह पे इस कदर, जमीन ही कहाँ है, मेरे अब पाँव जहाँ हैं । पेड कहाँ, हर तरफ़ मकानों का नजारा है, कोयल की कूक, काग की वो काँव कहाँ है। लोग घूमते …

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Aug
17

पहाडों से दूर…

Away from hills

पहाडों से दूर रहकर, हुई जिन्दगी पहाड सी, हरियाली दूर हो गई ये जिन्दगी उजाड़ सी। मिमिया गई आवाज शहर के शोर शार में, घाटी में गूंजी जो कभी, सिंह की दहाड़ सी। जीवन में ताजगी कहाँ, हवा नहीं ताजी नसीब, मुर्दे मे प्राण फूंकने , हो मानो चीर फ़ाड सी। हवा में शुद्ध गाँव …

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