Parashar Gaur

Author's details

Name: Parashar Gaur
Date registered: August 29, 2012
URL: http://www.www.facebook.com/parashar.gaur

Biography

I am a theater person, worked for Garhwali/Hindi Theater for more than 20 years as Actor/Writer/Director . I have written more than 30 songs which were telecasted by Akashwaani Delhi in 1970. I have written more than 300 Grahwali poems and article which were published in many internet web sites, news papers and magazines. In 1983, I made history by making the first Garhwali Feature film "JAGWAL". In 1989 I migrated to Canada and since then I am actively associated with Social Organizations. I am founder members of UCA ( Uttarakhand Cultural Association) ; served as President and Secretary for 10 years. My contribution for Uttarakhand cultural have been recognized all over India and abroad. I was awarded life time achievement award by UANA,America and UCA,Canada for my contribution to promote Garhwali culture and making film in Garhwali. I have been awarded by Late Shri Arjun Singh Gosain Samriti Sanstha Mumbai , Nawani Shahitya Purushkar Kanpur. I also published a book called " UKAAL-UNDHAAR" on Garhwali poems from Toronto Canada .

Latest posts

  1. दीप जलाने हो तो ? — November 12, 2012
  2. दुबिधा — November 10, 2012
  3. कुर्बानी — November 9, 2012
  4. एक आम गुंडे का आत्मसमान — November 8, 2012
  5. अभिन्दन — November 7, 2012

Author's posts listings

Nov
12

दीप जलाने हो तो ?

दीप जलाने हो तो ?

दीप जलाने हो तो मन के दीप जलाये नफरत की तिमर हटे चेहरों पे मुस्काने आये ! तम का तमस हटे बिश्वासों का शुत्रपात हो जन मांनस के उर में जागे प्रेम मिलन की लो हो जगमग जग हो उजियारा लौ दूर से दिये दिखाये ! बिघ्नो के लौ जले क्षितीज पर नया सबेरा हो …

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Nov
10

दुबिधा

कोई तो पथ मिले मुझे एसा जिस पर गमन करूँ … कोई तो सुरत मिले मुझे ऐसी जिसको नमन करूं !पथभ्रष्ट यहाँ है , पथ और पथिक किसको क्या कहूँ …… दो राहें , चौराहे भ्रमित करते मुझको किस पे बिश्वास करूँघात /प्रतिघातो के आघातों से पीड़ित और बिचलित हूँ ,, शंशय और शंकाओं से …

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Nov
09

कुर्बानी

एक आदमी ने अपने ड्राबिंग लासिंस में ये लिखा था की अगर मै किसी अकास्मिक दुर्घटना में मर गया तो मेरे सारे औरगन डोनिट कर दिये जाए ! अचानक वो दुर्घटना में जाता रहा और जो सबसे पहले उन समय लाइन में था, वो था , एक साराबी ! जिसका फेफड़ा पीने के कारण बुरी …

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Nov
08

एक आम गुंडे का आत्मसमान

मेरा देश महान है आज कल एक एड चला है ” इंडिया इस इन्करैडिबल ” जिसके तहत मुझे क्या दुनिया के तमाम फारन टुरिस्टो को कई दफा इतनी भयंकर तकलीफों का सामना करना पड़ता है की क्या बताये तब पता लगता है की कितना एनक्रैडिबल है ! खैर भारत महान है इन सब मामलो में …

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Nov
07

अभिन्दन

शिखरों पर फैलती प्रकाश करता भोर का अभिनन्दन बन-उपबन में भेद तम को प्राण फूंकती प्रभाती किरण रात्री का ब्याकुल अकुलाता छण तब करता शुभ प्रभात का अभिनन्दन …………………… ! खग के, कल कल करते कलरब देबाल्यो से आते प्रभाती स्वर ब्योम पर तैरती सिंदूरी रंग देती नव सुबहो को आमंत्रण ! सरिता बहती अल्हड …

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