Prakash at Bedupako

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Name: Prakash at Bedupako
Date registered: March 10, 2012
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Latest posts

  1. बागनाथ का वरदान (भाग-7) — April 9, 2013
  2. बागनाथ का वरदान (भाग-6) — April 9, 2013
  3. बागनाथ का वरदान (भाग-5) — March 20, 2013
  4. बागनाथ का वरदान (भाग-4) — March 4, 2013
  5. एक व्यंग्य – ना रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी ! — March 2, 2013

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  1. उत्तराखंड का एक औषधीय वृक्ष ‘तिमूर’ ( जेंथेजाइलम अरमेटम ) — 2 comments
  2. महर्षि वाल्मीकि जयंती — 2 comments
  3. नंदादेवी राजजात यात्रा -उत्तराखंड की एक परंपरागत विरासत (Uttarakhand Nanda Devi Raaj Jaat Yaatra) — 1 comment
  4. मानव निर्मित एक उत्क्रष्ट रचना “घराट” या “घट” का अस्तित्व खतरे में — 1 comment

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Apr
09

बागनाथ का वरदान (भाग-7)

आभार : पुष्कर पुष्प/शैलाभ रावत उधर मंदिर कि सीढ़ीयूँ पर बैठकर रात गुजारती राजुला मालूशाही के बारे में ही सोचती रही | रात जब आधी से ज्यादा बीत गयी और मंदिर पूरी तरह खाली हो गया, तो राजुला चुपचाप उठकर मंदिर में गयीं और भगवान बागनाथ की मूर्ति के चरणों में गिरकर गिडगिडाने लगी | उसके आंसुओं से भगवान …

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Apr
09

बागनाथ का वरदान (भाग-6)

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आभार : पुष्कर पुष्प/शैलाभ रावत भोट की सीमा पार कर जब राजुला रमोला के कोट से गुजर रही  थी, तो जंगल में भेड़-बकरियां चराते सदुवा रमोला की नजर उस पर पड़ी | सुनसान जंगल में बुरांश के फूल-सी खुबसूरत राजुला को देखकर सदुवा रमोला आश्चर्य में पड़ गया | वह जादू तो जानता ही था, …

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Mar
20

बागनाथ का वरदान (भाग-5)

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आभार : पुष्कर पुष्प/शैलाभ रावत राजमाता की बात सुनकर मालूशाही के मन को बड़ी शांति मिली | उसे विश्वास हो गया की सपने में साधू बाबा ने जो कहा, वह सच | राजुला उसी के लिए पैदा हुई है और उसे जरूर मिलेगी | राजकुमार की होंठों पर भेदभरी मुस्कान उभर आई | वह बोले,”राजमाता, …

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Mar
04

बागनाथ का वरदान (भाग-4)

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आभार : पुष्कर पुष्प/शैलाभ रावत राजुला और मालूशाही के लिए यह बात किसी रहस्य से कम नहीं थी | दोनों साधू की अलौकिक वाणी को बड़े ही मनोयोग से सुन रहे थे | साधू की एक-एक बात उनके कानों में अमृत सी उतर गयी | दरअसल उत्तरायनी मेला तो उनके लिए एक बहाना मात्र था …

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Mar
02

एक व्यंग्य – ना रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी !

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गन्ने की समस्या पर चर्चा चल रही थी । एक मर्मज्ञ विचारक ने अपने विचार कुछ यूँ व्यक्त किये ………… ‘प्यारे किसान भाइयो …….गन्ने की अभूतपूर्व समस्या से निपटने के लिए इसे जड़ से ख़त्म करना होगा । आज के दौर में बिना किसी फायदे के एक कदम चलना भी मूर्खता है । हमारे ख्याल से …

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