R K Naugain

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Name: Rakesh Naugain
Date registered: January 14, 2012
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Latest posts

  1. गर्चा सिंह -दबी आवाज का शेर — October 29, 2012
  2. और उसने मुझे मेरे ही घर का रास्ता दिखा दिया. — July 17, 2012
  3. लीला घस्यारी- Leela Ghasiyaari (The irritating cousin) — February 28, 2012
  4. भेड़ और भेड़िया – A satire on society — February 26, 2012
  5. पहाड़ी चांडाल — January 4, 2012

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  1. भेड़ और भेड़िया – A satire on society — 7 comments
  2. लीला घस्यारी- Leela Ghasiyaari (The irritating cousin) — 5 comments
  3. पहाड़ी चांडाल — 4 comments
  4. Myar Gaon ka Bhaddu — 1 comment

Author's posts listings

Oct
29

गर्चा सिंह -दबी आवाज का शेर

गरचा सिंह .. नाम जितना अलग उतना ही वह फौज़ी भी अलग था-प्लाटून कमांडर की घुडकी हो य कम्पनी मास्टर की तीखी नजर इन सबसे बेखबर था गरचा सिंह बाकि कहते यार गरचा तुझे देखकर लगता ही नही तू इनफेंट्री का सिपाही है सप्लाई वाला ज्यादा लगता है, ओ यार चौन्दा ता मै भि ऐयी …

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Jul
17

और उसने मुझे मेरे ही घर का रास्ता दिखा दिया.

और उसने मुझे मेरे ही घर का रास्ता दिखा दिया.   सैफुर्रहमान…. उसने दुबारा कहा ,मैनें सोचा दिखता तो हमारे जैसा ही. ज़ोशी ने बडी गर्मजोशी से उसका और मेरा परिचय कराया . बात दिल्ली की है जहां मैं और मेरा मित्र जोशी एक कमरे में रहती थे. और मित्रो का दायरा बडाने के सारे …

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Feb
28

लीला घस्यारी- Leela Ghasiyaari (The irritating cousin)

The story of an irritating cousin

! PAPA , look ! There is your Leela ghasiyaari yelled my 5 year young son. I giggled and looked in the rear view mirror of my car . There she was- –one of my Parus- The just christened Leela Ghasiyaari of our village. My love for Pahadi songs always was a big taboo during …

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Feb
26

भेड़ और भेड़िया – A satire on society

A satire on society by R. K. Naugain

एक बार एक भेड़िया सुबह-सुबह सैर पर निकला, सोचा क्यों न कुछ नया किया जाये| सो दातों मे उसने खोस ली कुछ हरी घास और जा बैठा एक पेड़ के नीचे (यह कहानी पहले शायद सुनी होगी पर कुछ अंतर है)| अब  भेड़िया बोलने लगा, सभी जानवर एक समान है कोई भेद नहीं , कोई शाकाहारी और मांसाहारी में भेद नहीं …

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Jan
04

पहाड़ी चांडाल

Old_Man_Young_Man

(उत्तराखंड के राजनैतिक हालात पर एक कहानी) बहुत समय पहले एक पहाडी नदी के किनारे दो चांडाल रहते थे| दोनो नदी के विपरीत किनारों पर रहकर अपनी जीविका कमा रहे थे| उनमें से युवा चांडाल एक मठ के अधीन काम करता था और मठ से अपने पारिश्रामिक के एवज में गरीब और लावारिश शवों का अंतिम …

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