Aug
13

Kulvir Singh Rawat: A Modern Garhwali Poet

Kulvir Singh Rawat: A Modern Garhwali Poet
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(गढ़वाल,उत्तराखंड,हिमालय से गढ़वाली कविता क्रमगत इतिहास भाग – )
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(Critical and Chronological History of Garhwali Poetry, part -)
By: Bhishma Kukreti
Kulvir Rawat published a couple of Garhwali poems of couplets and conventional styled poems. His poems are satirical and inspirational as well
Kulvir was born in 1958 in Sukai, Bangarsyun, Pauri Garhwal.
कुलवीर का दोहा (गढ़वाली दोहे )

रचना — कुलबीर सिंह रावत
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‘कुलबीर’ अपणि जगामा , सब्बि बणदन प्वाछू
हाथी ब्वगदन जै गदिना , उबै आंद वख माछू।
कबि नि हैंसा कै फरि , कबि नि कारा घमंड
उब उठाया जैन मुंड। वैकु फुट बरमुंड।

‘कुलबीर’ हर्चण को आंद बगत , हूण बैठद च्यार
भितर बुसेंदन चौंळ अर बाड़ खांद उज्याड़।

क्या तू अई दगड़ा लेकी , क्या तिन दगड़ी लिजाणा
म्यारू -म्यारु केकू कद्दी ? सब कुछ यखी छुटि जाण।

अपणा कर्मों की कचम्वळी , खाण प्वड़द हर कै
अपणो तमसू यखि द्यखदा मनिख , सोचि समझि कै रै।

अपणा दुःख से दुःखि नि मनखि , हैंका सुख से परेशान
घुंड -मुंड फुके किड्याण कख ? फिर बि बण्यु पधान।

Copyright@ Bhishma Kukreti, 2017
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Aug
13

Glimpse of Dabralsyun and Dhangu Villages in 1812

Glimpse of Dabralsyun and Dhangu Villages in 1812
British Administration in Garhwal -157
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History of British Rule/Administration over Kumaun and Garhwal (1815-1947) -177
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History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -1009
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By: Bhishma Kukreti (History Student)

In 1812, there were following details of huts in each village of Dabralsyun and Talla Dhangu under Dhangu Kamin (Dabral)-
Village —— Number of Huts——— Village —— Number of Huts
Gauli – ———— 7————————–Kuntani ———–5
Davoli- ————-6—————————Amaldu——–4
Masirkot————1—————————– Masogi —–4
Khaman————-5———————————-Nadu—13
Jogyana————–4——————————–Kothakhola —-3
Kothar —————12———————————Syanlgaun—–5
Dobari—————-2———————————-Dikhet—–4
Kheda —————-2———————————-Pabyakh——3
Deubadi————–2————————————-Judd—-3
Dhaunri —————8———————————- Dabar —9
Timli—————-5—————————————Dangla —4
Jamal —————–3—————————————-Syanl—–10
Jalth——————-5———————————-Kathur—5
Dhari——————10———————————Dhasi—–7
Dhounr—————7———————————–Manjokhi —-9
Kund——————–9———————————–Khera—-4
Nauth——————–2———————————Mall —-11
Nakuri———————6 ——————————–Kota—9
Palel ———————-4———————————- Bijani—13
Ucchakot —————9
In Gorkha rule, other village details already detailed.

XXX
References
1-Shiv Prasad Dabral ‘Charan’, Uttarakhand ka Itihas, Part -7 Garhwal par British -Shasan, part -1, page- 332-456
2 Hamilton, Description of Hindustan, Vol 2, page 639-48
3- Asiatic Researches Vol.1, page 324-330
4- Dabral, ibid page 343

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Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India,bjkukreti@gmail.com 13/8/201710History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued… Part -1010
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*** History of British Rule/Administration over British Garhwal (Pauri, Rudraprayag, and Chamoli1815-1947) to be continued in next chapter
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(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)

Forest settlement , History of British Rule, Administration , Policies, Revenue system, over Garhwal, Kumaon, Uttarakhand ; Forest settlement , History of British Rule , Administration , Policies Revenue system over Pauri Garhwal, Udham Singh Nagar Kumaon, Uttarakhand; History of British Rule, Administration, Policies ,Revenue system over Chamoli Garhwal, Nainital Kumaon, Uttarakhand; Forest settlement , History of British Rule, Administration, Policies ,Revenue system over Rudraprayag Garhwal, Almora Kumaon, Uttarakhand; History of British Rule, Administration, Policies ,Revenue system over Dehradun , Champawat Kumaon, Uttarakhand ; History of British Rule, Administration, Policies, ,Revenue system over Bageshwar Kumaon, Uttarakhand ; Patwari , Civil Police History of British Rule, Forest settlement, Administration, Policies, Revenue system over Haridwar, Pithoragarh Kumaon, Uttarakhand;

Aug
13

चला गोरखपुर चला , बड़ी जीमण (महाभोज ) खाणो चला !

चला गोरखपुर चला , बड़ी जीमण (महाभोज ) खाणो चला !

(Best of Garhwali Humor , Wits Jokes , गढ़वाली हास्य , व्यंग्य )
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चबोड़ , चखन्यौ , ककड़ाट ::: भीष्म कुकरेती

कबूतर – खुस खबर ! खुस खबर ! ब्रेकिंग न्यूज – गोरखपुर मा पांच दिन मा 60 बच्चा अस्पताल मा मोरी गेन। खुस खबर … सबसे पैल मीन हौर कबूतरों से पैल खबर दे हाँ। मि नंबर वन खबरची छौं। खुस खबर … ब्रेकिंग न्यूज …

घिंडुड़ी – ये नरबै खबरची ! तू त इन खुस ह्वेक खबर दीणि छे कि जन बुल्यां राहुल गाँधी मोदी सरकार मा शामिल ह्वे गे हो।
कबूतर – अरे मानव संसार मा टीवी चैनल तै टीआरपी बढाण जब मुख्य उद्देश्य ह्वे जावो तो हम कबूतर किलै पैथर रौंवां भै ? खुस खबर ! गोरखपुर मा 60 बच्चों की मौत … खुस खबर …
चौंर्या स्याळ (शेर जन दहाड़ ) – अछेकि खुस खबर , सच्चेकि खुस खबर ! बुरी खबर शेर सिंगौ कुण। आज तीन साल मा पैलि बार हम स्याळ , कुरस्यळी , छिपड़ुं कुण अच्छे दिन ऐन कि हम शेर सिंग तै नंगा करला।अछेकि खुस खबर ! सच्चेकि खुस खबर ! शेर सिंग ! अब देख तेरी कन धज्जी उड़ौंदा धौं। अब हम ‘लाशों मा खड़ ह्वेका रॉक ऐंड रॉकल डांस करला ‘ हहा ! हहा ! ब्वा !
कुरस्यळी – पर सात साल पैल तो म्यार राज छौ अर तब ही …
छिपड़ु – हाँ चार मैना पैल तक मी त …
पद्या स्याळ – हे मूर्ख मनुष्यों च्याला ! भूली जावो कि बच्चों की मृत्यु की नींव तुमर बगत धरे गे छे। अबारी तो शेर सिंग को भतिया भंद करणो माकूल समय आयुं च। चला गोरखपुर , चला उख बड़ी जीमण खैक आंदा।
घिंडुड़ी – अरे थ्वरदन्यो ! उख 60 बच्चों की मौत हुयीं च अर तुम तैं महाभोज खाणै पड़ीं च ?
कव्वा – अरे जब द्वी साल पैल जब बंगाल मा इनि बच्चों मौत ह्वे छे तो सिद्धार्थ सिंग जु आज उत्तर प्रदेशौ स्वास्थ्य मंत्री च वैन ममता बनर्जी को इस्तीफा नि मांगी छौ ? बंगाल मा शेर सिंग वळुंन महाभोज की खुसी नि मनै छे ? बच्चों का लाशों मथि डौंड्या नर्सिंग, कैंतुरा नाच अर पिशाच नाच नि नाची छा इ शेर सिंग वळ ?
चौंर्या स्याळ – या घिंडुड़ी आत्मा आवाज सुणदी हम जघन्य मानव भक्षी जानवरों तै ईंक बात कत्तै नि सुणण। चला गोरखपुर चला। उख 60 बच्चों की मौत का जश्न , त्यौहार, कौथिग मनाये जाय। लाशों का मथि पंडों नाचे जाय। भौत सालों बाद सुख का दिन आयो रे भायो।
छिपड़ु – उख करण क्या च ?
नागनाथ – अरे जब सांपनाथ विरोध मा छा तो इन कारुणिक मौत पर जन सांपनाथ हमर सरकारौ विरोध मा लाशों मथि कुत्सित , घृणित अर निर्दयी खेल खिल्दा छा तनि हम बि खिलला।
छिपड़ु – हाँ पर क्या करण गोरखपुर जैक ?
पद्या स्याळ – उनि जनि विरोध मा रैक शेर सिंग वळ करदा छा। दुनिया भर का कबूतरों तै भट्येक प्रत्येक बच्चा की लाश का ऊपर खुट धरिक फोटो खैंचाण अर दुन्या तै दिखाण कि हम बच्चों की मौत से संतप्त छंवां , अति दुखी छंवां, , असह्य वेदना मा छंवां। यद्यपि असल मा भितर से बड़ा खुस हूणा रौला।
कव्वा – औ फोटो टूर जन राहुल गाँधी अबि गुजरात मा बाढ़ पीड़ितों बान फोटो टूर करिक आयी।
पद्या स्याळ – अर कबूतरों का समिण भोगी , शेर सिंग अर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का इस्तीफा की मांग करला।
नागनाथ – तो सांप लोग बि त इन मौतों पर फोटो टूर करिक मृत्यु नाच, डेथ डांस करदा छा, हम तै सांपनाथ बेनकाब करदा छा अर हम शर्मसार हूंद छा , हम मजबूरी मा गुवक घूँट पींदा छा। अब हम बदला ल्योला। शेर सिंग वळ विरोध मा रैक इन दर्दनाक हादसा पर जन हमर कुहाल करदा छा, हम तै बेपर्दा करदा छा , फोकट का भगार लगांदा छा उनी अब हम शेर सिंग वळुुं तै डंसला।
छिपड़ु – घुंड फुड़णो बदला मुंड फुड़ण से।
कुरस्यळी -गायों की मौत मातम का बदला बच्चों की मौत मातम से !
कव्वा -एक आँख फोड़ने का बदला दो आँख फोड़ने से !
नागनाथ – दूसरों के अंडे खाने का बदला अपने ही अंडे खाने से !
घिंडुड़ी – अरे स्वास्थ सेवा की बहस शुरू हूण चयेंद छे अर तुम …
सब – बंद कौर आत्मा की आवाज वळि बकबास ! गोरखपुर चलें और बच्चों की मौत का तमसगीर बन राजनीति का हलवा, पूरी , कलाकंद खाया जाय !

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Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India ,13 /8 / 2017

*लेख की घटनाएँ , स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में कथाएँ , चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने हेतु उपयोग किये गए हैं।
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Aug
12

Surendra Pundir : A Garhwali poet of varied subject

Surendra Pundir : A Garhwali poet of varied subject
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(गढ़वाल,उत्तराखंड,हिमालय से गढ़वाली कविता क्रमगत इतिहास भाग -184 )
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(Critical and Chronological History of Garhwali Poetry, part -184)
By: Bhishma Kukreti
Surendra Pundir is more famous for Jaunpur (Tehri) folk culture and literature writings and literature activist of Mussurie.
Surendra Pundir was born in 1956 in Jaunsar of Garhwal.
Surendra Pundir wrote a couple of Garhwali poems and are varied in nature. His focus in poetry is about Jaunpur culture and Mussurie region.

टोपली (पर्यटन की असलियत दर्शाती गढ़वाली कविता )

रचना — सुरेंद्र
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बरखा का बाद
धुयूं द्यूलयूं -खातणू सी
लगदी छै मसूरी
तबारि
बौल्या लगदान ऐ जान्दि
पहाड़ै
मुखड़ी पर चमक
जनू कै भूखा बच्चा तैं
मिलदू छ ब्वे कू दूध
पसेली
डाँड्यूं मा
बैठी जांदी धुप्प कुयेड़ी
जनू बौण मा छै जान्दन
तस्कर।
हमारू बणू सी चलदू छ जीवन
वो सेकदान रोट्टी
यख
मनखी
स्वारथ की
टोपली पैरिक
होण चांदू जिन्दू।

Copyright@ Bhishma Kukreti, 2017
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Aug
12

Jabar Singh Kaintura: Garhwali Poet

Jabar Singh Kaintura
(गढ़वाल,उत्तराखंड,हिमालय से गढ़वाली कविता क्रमगत इतिहास भाग -183 )
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(Critical and Chronological History of Garhwali Poetry, part -183)
By: Bhishma Kukreti
Jabar Singh Kaintura contributed Garhwali literature by creating short stories and poetries. Jabar Singh Kaintura was born in Ringoli village , Lotsu Patti of Tehri Garhwal adjacent to Shrinagar.
Jabar Singh Kaintura was a union activist too.
Jabar Singh Kaintura published around 15 Garhwali poems in Hilans, Alaknanda and other periodicals. Madan Duklan included his poem in Angwal a 300 Garhwali poetry collection.
His poem ‘Hamara Auji’ is a portrait of a customary Dhol player Gyanu.
The poem ‘ Chitthi Man Tain’ by Jabar is praising his mother land Garhwal and its natural beauty.
‘Azadi’ poem by Kaintura is a satirical poem and criticizes the wrong doings by politicians, administration.
Gwain (Gwairan) poem is about illustration of daily life of a she shepherd.
Jabar Singh satirizes the organizers of International Youth Year in ‘ Jwanun Sal’. Kaintura observes that in his society , the child enters into old life and now that old generation is celebrating youth year as old leader Babu Jagjivan ram was made Youth congress President by Indira Gandhi.
The ‘ Meri Charyun’ or Like Me is another satire criticizing the corrupt mentality in the society. Jabar Singh states that everybody is interested in getting money by corrupt or easy means. Those avail corrupt methods and earn extra money don’t criticize corruption but those are unable to get money by corrupt methods start criticizing corruption.
Basgyal is illustration of rain in Garhwal hills.
Jabar Singh uses dialects from Lotsu Tehri region and uses common Garhwali phrases.
Hilans editor late Arjun Singh Gusain, Alaknanda editor Swarup Dhoundiyal and famous poet Puran Pant Pathik appreciated poetries by Jabar Singh Kaintura.
बसग्याळ ( वर्षा विवरण की रसयुक्त कविता )

रचना — जबर सिंह कैंतुरा
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बादळू गगड़ाट,
गदरौं स्वींसाट ,
स्वीली डर ,
झिड़ बिड़ो , भितर भैर ,
लुकीन स्याळ -यूँ मैनों बसग्याळ
झंगोरू , क्वादु , मार्छु ग्वडणू ,
नै ब्योली मन खुद्यणू।
संग्त धांणी -धांणी / गदरौं ल्यंगड़ा,
कंडळि का झ्यंकड़ा /हर्यूं हर्यूं घास बसग्याळ मॉस।
सार्यों -सार्यों रोपण होणी ,
सुज्जि -भुज्जि अर गोन्द्कि नौणी।
कौल्या कंडळि /भुट्याणु -अंगाळि,
घिंघरू -किनगोड़ रिक्कै -डौर ,
बिजलि चलकणी , ज्वंक्कि बिल्कणी
सौणै कुरेड़ि भ्वीं फुंड लिटणी
बाळणि भैंसि छक्की दूध देणी।
पोथळौञ को च्वींचाट , म्यंडगौं का टर्र टर्राट
किदलौं को गिजबिजाट
झ्यास्सु को लमड्यात / गेंडवाळवी चलमलाण
नुन्यारों कि न्वीन्याण
ग्वडदरि ब्यखनां अब्यsर मुंणखा बिटोळणी ,
चस्का जुनखौं मा वूंतैं ‘वू ‘ कि खुद लगणी।

Copyright@ Bhishma Kukreti, 2017
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