Jan
29

श्रीमद भगवद गीता मा व्यंग्य झलक

Satire and its Characteristics, Bhagvad Geeta व्यंग्य परिभाषा, व्यंग्य गुण /चरित्र
-
श्रीमद भगवद गीता मा व्यंग्य झलक
-

(व्यंग्य – कला , विज्ञानौ , दर्शन का मिऴवाक : ( भाग -21 )

भीष्म कुकरेती
-

श्रीमद भगवद गीता क्वी धार्मिक पुस्तक नी च अपितु साँख्य योग याने Auto Suggestion की अभ्यास दर्शन च। इनि अष्टवक्र की महागीता बि स्वयं सम्मोहन याने Auto Suggestion दर्शन या अनुभव च। हिन्दू और मुसलमानों दुयुं तै गलतफहमी च। हिन्दू -सनातन धर्म से या कर्मकांडी धर्म से द्वी गीताऊँ कुछ लीण -दीण नी च।
साँख्य योग याने Auto Suggestion की अभ्यास दर्शन चजब त गीता मा हौंस -चबोड़ की कम ही गुञ्जैस च। चूँकि गीता एक मनोविज्ञान की पुटक च तो इखमा मनोविज्ञान का हिसाबन ही वार्तालाप च।
सबसे पैलो अध्याय मा दुर्योधन बुल्दु बल पांडव सेना महावीर भीम से रक्षित च तो यो अफिक ही एक व्यंग्य च। युद्ध से पािल क्वी बि सिपाही या रणनीतिकार कै सिपाही या सेनापति तै परमवीर चक्र जन पदवी नि दीन्दो। किन्तु दुर्योधनन भीम तै जताई कि कुरुक्षेत्र युद्ध भीम द्वारा जिते सक्यांद याने भीम हीरो च। किन्तु असलियत मा क्या ह्वे ? कुरुक्षेत्र का असली हीरो अर्जुन सिद्ध ह्वे ना कि भीम।

कृष्ण अधिकतर अर्जुन तै कै ना कै विश्लेषण युक्त नाम से जन कि पार्थ , कुंतीपुत्र , शेरपुरुष , भरतश्रेष्ठ , पाण्डुपुत्र , कौरववंशी , पांडव , आदि नाम से भट्यांदन अर भौत सी जगा मा अर्जुन तै मानसिक रूप से अळग चढांदन अर फिर अग्वाड़ीs पंकत्युं मा अर्जुन का अहम पर चोट करिक अर्जुन का मानमर्दन करदन अर यही तो व्यंग्यकार करदो।
दुसर अध्यायम एक जगा मा अर्जुन युद्ध नि करणै बात करदो तो कृष्ण अर्जुन पर व्यंग्य करदन बल तेरो शरीर क्षत्रिय को च , तेरो ब्यापार क्षत्रिय को च अर तू पण्डित या बामणु जन छवी लगाणु छै ? या उक्ति व्यंग्य को आछो उदाहरण च।
स्वामी चिन्मयानन्द जीन बि अपण गीता टीका ( The Bhgvad Geeta अध्याय 4 पृष्ठ 88 -89 ) मा गीता मा व्यंग्य की झलक सिद्ध कार अर ब्वाल कि गीता (चौथा अध्याय श्लोक संख्या 41 आदि ) मा कृष्णन कटु व्यंग्य प्रयोग कारिक अर्जुन तै झपोड़।
इनि ए. पार्थसारथी अपण भगवद गीता ग्रन्थ (44 वां भाग ) मा सिद्ध करदन बल गीता मा महर्षि व्यासनं ऊँ लोगों (ऋषि , पण्डित ) पर व्यंग्य कर जु सिरफ नाम का वास्ता तपः आदि का प्रयोग करदन या जनूनी ढंग से पूजा पाठ करदन या धोखा दीणो बान पूजा करदन

-

29 / 1 /2017 Copyright @ Bhishma Kukreti

Discussion on Satire Bhagvad Geeta; definition of Satire; Verbal Aggression Satire Bhagvad Geeta; Words, forms Irony, Types Satire Bhagvad Geeta ; Games of Satire Bhagvad Geeta; Theories of Satire Bhagvad Geeta Bhagvad Geeta; Classical Satire Bhagvad Geeta ; Censoring Satire Bhagvad Geeta ; Aim of Satire Bhagvad Geeta; Satire and Culture Bhagvad Geeta, Rituals
व्यंग्य परिभाषा , व्यंग्य के गुण /चरित्र ; व्यंग्य क्यों।; व्यंग्य प्रकार ; व्यंग्य में बिडंबना , व्यंग्य में क्रोध , व्यंग्य में ऊर्जा , व्यंग्य के सिद्धांत , व्यंग्य हास्य, व्यंग्य कला ; व्यंग्य विचार , व्यंग्य विधा या शैली , व्यंग्य क्या कला है ?

Thanking You .
Jaspur Ka Kukreti

Jan
27

Forest Administration by Ramsay

Forest Administration by Ramsay
-

Exploitation of Forest Resources-4

-
British Administration in Garhwal -105
-
History of British Rule/Administration over Kumaun and Garhwal (1815-1947) -122
-

History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -959
-
By: Bhishma Kukreti (History Student)

-
One of various steps for reforming forest administration by Kumaon commissioner Captain Henry Ramsay was forest protection.
Atkinson called Ramsay as first conservator of Uttarakhand.
Ramsay stopped offering old system of offering forest on contract and started new system. Henry Ramsey stopped farming inside forests. Ramsey offered land to those were farming in hill forests in Bhabhar or Haridwar to Baramdev region. That was first appreciable step in protection for forests.
By 1867, Ramsey displaced Goth (a temporary camp for animals) from forest of Haldwani to Sharda River. Ramsey desired for displacing all ‘Goth’ from Garhwal forests.
Ramsey started branding / indentifying by the officials the trees to be cut by contractors. The government officials used to hammer on trees to be cut. By displacing Goth from forests was also for decreasing forest fire in summer season. By that there were difficulties for Goth masters but was fine for forest protection. Ramsey started cultivating new tress too. There was increase in forest revenue and there was net saving for Rs 15 lakhs in 1867-68 after all expenses (Atkinson page 853).

-
Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India, bckukreti@gmail.com 27/1/2017
History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued… Part -960
-
*** History of British Rule/Administration over British Garhwal (Pauri, Rudraprayag, and Chamoli1815-1947) to be continued in next chapter
-
(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)
XX
References
1-Shiv Prasad Dabral ‘Charan’, Uttarakhand ka Itihas, Part -7 Garhwal par British -Shasan, part -1, page- 287-312
2- Atkinson, Himalayan Districts, Vol.-1 page 840-915

Xx

History of British Rule, Administration , Policies, Revenue system, over Garhwal, Kumaon, Uttarakhand ; History of British Rule , Administration , Policies Revenue system over Pauri Garhwal, Udham Singh Nagar Kumaon, Uttarakhand; History of British Rule, Administration, Policies ,Revenue system over Chamoli Garhwal, Nainital Kumaon, Uttarakhand; History of British Rule, Administration, Policies ,Revenue system over Rudraprayag Garhwal, Almora Kumaon, Uttarakhand; History of British Rule, Administration, Policies ,Revenue system over Dehradun , Champawat Kumaon, Uttarakhand ; History of British Rule, Administration, Policies, ,Revenue system over Bageshwar Kumaon, Uttarakhand ;
History of British Rule, Administration, Policies, Revenue system over Haridwar, Pithoragarh Kumaon, Uttarakhand;

Jan
26

उपनिषदुं मा हौंस -व्यंग्य -2

Satire and its Characteristics, Satire and humor in Upnishad व्यंग्य परिभाषा, व्यंग्य गुण /चरित्र
-
उपनिषदुं मा हौंस -व्यंग्य -2
-

(व्यंग्य – कला , विज्ञानौ , दर्शन का मिऴवाक : ( भाग – 20 )

भीष्म कुकरेती
-

उपनिषदुं तै आम लोक धार्मिक ग्रन्थ मन्दन पर उपनिषद विशुद्ध मनोविज्ञान कु विज्ञानं छन। इनम हौंस -व्यंग्य मुश्किल से मिल्दैन। किन्तु छान्दोगेय उपनिषद (1 :12 ) मा व्यंग्य उफरिक आयुं च ( S .C . Sen , The Mystic Philosophy of Upnishads, page 45 ) । ये अध्याय मा शौव उद्गीथ सिद्धांत समझाणो बान रचयिता कुत्तों उदाहरण दीन्दो। एक ऋषि ग्लावs समिण कुछ कुत्ता ( ऋषि ) आंदन अर एक सफेद कुत्ता से भोजन की अपेक्षा करदन। सफेद कुत्ता ऊँ कुत्तों से सुबेर आणो बुल्दो। दुसर दिन वो अलौकिक कुत्ता एक हैंकॉक पूँछ अपण मुख पूटुक लेकि इनि आंदन जन वैदिक ऋषि जुलुस माँ आंदन। अर ऊँ सब्युन हिंकार (‘हि ‘ स्तोभ ) शुरू कार अर सब बुलण लगिन , हम भोजन , जलपान का इच्छुक छंवां … हम तै अन्न द्यावो , अन्न द्यावो … ” ये खण्ड मा वैदिक ऋषियों को लालच पर सचमुच माँ एक व्यंग्य च अर ऋषि कुत्तों की योनि वास्तव माँ ऋषियों द्वारा कुत्ता जन व्यवहार पर व्यंग्य ही च। ये सन्दर्भ मा John Oman ( Natural and Supernatural पृष्ठ 490 ) छान्दोगेय उपनिषद का उदाहरण दीन्दो अर बथान्द बल भौत सा ऋषि बगैर अर्थ समझ्यां वैदिक ऋचा जोर जोर से बखणा रौंदन अर यो बात उपनिषद मा व्यंग्य शैली से बुले गे ।
S .C Sen बथान्दन बल बृहद अरणायक उपनिषद (अश्वपति आख्यान अध्याय ) मा पशु बलि की भर्त्सना वास्तव मा व्यंग्य रूप से करे गे अर उपनिषदनिक व्यंग्य को सर्वोत्तम उदाहरण च।
A .B . Keithन ( The Relgion and Philosophy of Veda and Upnishads ) बि वेद अर उपनिषदुं मा व्यंग्य का उदाहरण पेश करिन।

-

26/ 1 /2017 Copyright @ Bhishma Kukreti

Discussion on Satire; Upnishad definition of Satire; Upnishad Verbal Aggression Satire; Upnishad forms Irony, Types Satire; Upnishad Games of Satire; Theories of Satire; upnishad Classical Satire; Censoring Satire; Aim of Satire; Satire and Culture , Rituals व्यंग्य परिभाषा , व्यंग्य के गुण /चरित्र ; व्यंग्य क्यों।; व्यंग्य प्रकार ; व्यंग्य में बिडंबना , व्यंग्य में क्रोध , व्यंग्य में ऊर्जा , व्यंग्य के सिद्धांत , व्यंग्य हास्य, व्यंग्य कला ; व्यंग्य विचार , व्यंग्य विधा या शैली , व्यंग्य क्या कला है ?

Thanking You .
Jaspur Ka Kukreti

Jan
24

उपनिषदुं मा हौंस -व्यंग्य -1

Satire and its Characteristics, Upnishad , व्यंग्य परिभाषा, व्यंग्य गुण /चरित्र

उपनिषदुं मा हौंस -व्यंग्य -1

(व्यंग्य – कला , विज्ञानौ , दर्शन का मिऴवाक : ( भाग -19 )

भीष्म कुकरेती

उपनिषद याने मनोविज्ञान की छ्वीं। याने धर्मै छ्वीं। याने बड़ो गम्भीर साहित्य। उन बि भारत माँ धार्मिक आख्यानों मा हौंस -व्यंग्य कमि मिल्दो। पण आखिर उपनिषद बि मनिखों की इ रचना छन तो उपनिषदों मा बि कथ्या जगा हौंस -व्यंग्य मिल्द च।
छान्दोगेय उपनिषद मा ‘जबला पुत्र सत्यकाम ‘ कथा तो असली व्यंग्य च। सत्यकाम गुरुकुल जाण चाणों छू तो वैन अपण माँ तै अपण गोत्र पूछ। ब्वे न बताई बल वा तो युवावस्था म परिचारिणी थै अर तबी वीं सणि सत्यकाम प्राप्त ह्वे। अतः जाब्ला तै पता नी छू कि वींको पुत्रो असली गोत्र क्या छौ। सत्यकाम जब गुरुकुल पौंछ त वैन गुरु तै अपण गोत्र नि बताई अर सीढ़ी सच्ची बात बथै दे तो गुरुन बोली बल इन स्पष्ट भाषण क्वी ब्राह्मण पुत्र नि दे सकुद , गुरुन सत्यकाम तै पढाणो जगा चार सौ कमजोर , मरतणया गौड़ चराणो भेजी दे। सत्यकामन प्रण ले बल जब तलक १००० गौड़ नि ह्वे जाल वैन बौण ही रौण। जंगळ मा सत्यकाम तै सांड , अग्नि , हंस , मद्गुनन सत्यकाम तै ज्ञान दे। जब वो गुरु का पास ऐ तो गुरुन वी चार ज्ञान देन , फिर वै तै गुरु की जगा अग्न्युन ज्ञान दे।
या कथा वास्तव सामाजिक परिवेश पर बि व्यंग्य च और जात पांत पर व्यंग्य का साथ साथ यो बि बथान्द कि ज्ञान का वास्ता गुरु से अधिक प्रकृति कामयाव गुरु च। अपरोक्ष रूप से अब्राह्मण शिष्य तै पढाण मा आनाकानी एक व्यंग्य ही च। (chhandogey Upnishad 4.4 to 4.9

24 / 1 /2017 Copyright @ Bhishma Kukreti

Discussion on Satire Upnishad; definition of Satire; Verbal Aggression Satire; Upnishad, Words, forms Irony, Types Satire Upnishad; Games of Satire Upnishad ; Theories of Satire Upnishad ; Classical Satire Upnishad ; Censoring Satire; Aim of Satire; Satire and Culture , Upnishad , Rituals ,Upnishad
व्यंग्य परिभाषा , व्यंग्य के गुण /चरित्र ; व्यंग्य क्यों।; व्यंग्य प्रकार ; व्यंग्य में बिडंबना , व्यंग्य में क्रोध , व्यंग्य में ऊर्जा , व्यंग्य के सिद्धांत , व्यंग्य हास्य, व्यंग्य कला ; व्यंग्य विचार , व्यंग्य विधा या शैली , व्यंग्य क्या कला है ?

Jan
23

Satire and its Characteristics, Ramayana Stories व्यंग्य परिभाषा, व्यंग्य गुण /चरित्र

Satire and its Characteristics, Ramayana Stories व्यंग्य परिभाषा, व्यंग्य गुण /चरित्र
-
वाल्मीकि अर हौर रामायणो मा हौंस -व्यंग्य

-

(व्यंग्य – कला , विज्ञानौ , दर्शन का मिऴवाक : ( भाग 18 )

भीष्म कुकरेती
-
हाँ उन त वाल्मीकि रामायण एक गम्भीर महाकाव्य च अर सैत च वैबगत ऋषि कम ही हास्य -व्यंग्य कृति रचदा रै होला। पण कथा माँ हौंस -व्यंग्य अफिक बि ऐ जांद।
वाल्मीकि रामयाण रचना काल का हास्य -व्यंग्य संस्कृति अर आजका व्यंग्य संस्कृति मा भौत अंतर च तो हम वाल्मीकि रामयण का भौत सा हास्य अर व्यंग्य तैं समजी नि सकदा। फिर भी खुजनेरुंन कुछ न कुछ ख्वाज च।
मंथरा -कैकेयी सम्बाद मा मंथरा द्वारा कैकेयी की उलाहना वाल्मीकि रामयण मा व्यंग्यौ सबसे बडो उदाहरण च।
जे. के . त्रिखान ( A Study of Ramayana (1981, Bharti Vidya Bhawan ) वाल्मीकि द्वारा मन्थरा कैकेयी सम्बाद, शूर्पणखा लक्ष्मण संवाद , शूर्पणखा -रावण सम्बाद आदि खण्डों माँ हास्य व्यंग्य का खोजपूर्ण विवरण दे .
पी ऐस सुब्रमण्य शास्त्री न बि A Critical Study of Valmiki Ramayana माँ हास्य -व्यंग्य बहुत सा उदाहरण देन अर ल्याख बल ‘त्वद्विधानां’, अपूर्वी , भार्यया शब्दों तै शिल्ष्ट अलंकार प्रयोग से हास्य व्यंग्य पैदा करे गे (पृष्ठ 28 )
हौर भाषाओं मा वाल्मीकि रामायण पर आधारित रामायण ग्रन्थों मा त हास्य व्यंग्य भौत मिल्दो। तुलसीकृत रामचरित मानस , आदि रामायणों मा हास्य -व्यंग्य मिळद च।
Paula Richman की Ramayana Stories in Modern South India (2008 ) मा रामायण कथाओं मा हास्य व्यंग्य का क्षणों वर्णन मिल्दो।
पण्डित राधेश्याम कथावाचक कृत रामलीला हेतु रचीं रामायण मा तो दसियों जगा हास्य -व्यंग्य मिल्दो।
गुणानन्द पथिक की गढ़वाली रामलीला मा बि दसियों जगा हास्य -व्यंग्य मिल्दो।
रामायण विषयी गढ़वाली विडीओओं मा बि दसियों जगा हास्य -व्यंग्य मिल्दो।

23 / 1 /2017 Copyright @ Bhishma Kukreti

Discussion on Satire in Ramayana ; definition of Satire; Verbal Aggression Satire in Ramayana ; Words, forms Irony in Ramayana , Types Satire in Ramayana ; Games of Satire in Ramayana ; Theories of Satire in Ramayana ; Classical Satire in Ramayana ; Censoring Satire in Ramayana ; Aim of Satire in Ramayana; Satire and Culture , Rituals in Ramayana
व्यंग्य परिभाषा , व्यंग्य के गुण /चरित्र ; व्यंग्य क्यों।; व्यंग्य प्रकार ; व्यंग्य में बिडंबना , व्यंग्य में क्रोध , व्यंग्य में ऊर्जा , व्यंग्य के सिद्धांत , व्यंग्य हास्य, व्यंग्य कला ; व्यंग्य विचार , व्यंग्य विधा या शैली , व्यंग्य क्या कला है ?

Thanking You .
Jaspur Ka Kukreti

Older posts «

» Newer posts

Copy Protected by Chetans WP-Copyprotect.