आभार : पुष्कर पुष्प/शैलाभ रावत उधर मंदिर कि सीढ़ीयूँ पर बैठकर रात गुजारती राजुला मालूशाही के बारे में ही सोचती रही | रात जब आधी से ज्यादा बीत गयी और मंदिर पूरी तरह खाली हो गया, तो राजुला चुपचाप उठकर मंदिर में गयीं और भगवान बागनाथ की मूर्ति के चरणों में गिरकर गिडगिडाने लगी | उसके आंसुओं से भगवान …
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Mar
02
एक व्यंग्य – ना रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी !
गन्ने की समस्या पर चर्चा चल रही थी । एक मर्मज्ञ विचारक ने अपने विचार कुछ यूँ व्यक्त किये ………… ‘प्यारे किसान भाइयो …….गन्ने की अभूतपूर्व समस्या से निपटने के लिए इसे जड़ से ख़त्म करना होगा । आज के दौर में बिना किसी फायदे के एक कदम चलना भी मूर्खता है । हमारे ख्याल से …
Sep
22
कोट की माई का मेला
कोट की माई का मंदिर अल्मोड़ा से ग्वालदम जानेवाले रास्ते पर बैजनाथ से ३ कि.मी. की दूरी पर ऊँची चोटी पर स्थित है । यहाँ पहुँचने के लिए १ से ११/२ कि.मी. की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है । रणचूला नाम से विख्यात इस स्थान पर कभी कत्यूरी राजाओं ने अपना किला बनवाया था । गढ़वाल …
Sep
20
मोष्टामाणू का मेला – जनपद पिथौरागढ़
पिथौरागढ़ जनपद मुख्यालय के चतुर्दिक फैले ग्रामीण क्षेत्रों में तीन प्रसिद्ध मेलों का प्रतिवर्ष आयोजन किया जाता है । भाद्रपद की गणेश चतुर्थी को ध्वज नामक पहाड़ की चोटी पर देवी मेला लगता है । इसके दूसरे दिन हरियाली तृतीया को किरात वेश में रहने वाले भूमि के स्वामी केदार नाम से पूजित शिव के …
Sep
20
उत्तराखंड का प्रसिद्द मेला :- नंदादेवी मेला
समूचे पर्वतीय क्षेत्र में हिमालय की पुत्री नंदा का बड़ा सम्मान है । उत्तराखंड में भी नंदादेवी के अनेकानेक मंदिर हैं । यहाँ की अनेक नदियाँ, पर्वत श्रंखलायें, पहाड़ और नगर नंदा के नाम पर है । नंदादेवी, नंदाकोट, नंदाभनार, नंदाघूँघट, नंदाघुँटी, नंदाकिनी और नंदप्रयाग जैसे अनेक पर्वत चोटियाँ, नदियाँ तथा स्थल नंदा को प्राप्त …




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