बल हमन भौत तरक्की कैरि यालि गौंकि कूड़ी छोडिकै शहर मा शिफ्ट कैरि यालि सेरी-घेरी पुंगड़ी सबि बांजि छनुड़ी रीति भैंसि हंडा मा बल्द -गौड़ी जंगळ मा आवारा छोडि यालि दूध का बदल सफ़ेद पौडर कु छोळ घर्या घ्यू का बदल रिफैंड-डालडा-नकली घ्यू ताज़ी नौणि का बदल अमूल बटर गौं मा नि मिलदी पीणे छांछ …
Tag Archive: Dr. Narendra Gauniyal
Jun
03
एक द्वी ही भौत छन,नौनु हो या नौनि दा
एक द्वी ही भौत छन,नौनु हो या नौनि दा. होलि मुश्किल सैंतणा की,निथर तब हे दिदा. बिंडी ह्वाला तब क्य खाला,पुट्गी राली खाली दा. सबि नंगा-भूखा उन्नी राला,तब क्य होलू हे दिदा. ल्यखणु-पढणु, झुल्ला-गफ्फा,आलो कख बिटिकी रे. फिर एक बन्दा अर सौ धंधा,तब क्य होलू हे दिदा. भर्ती हूणू इस्कुलों मा,ह्वैगे मुश्किल यूं दिनों. ढेबरा-बखरा …
Jun
02
फर्शी: एक गढ़वाली कथा
सफ़ेद धोती,सफ़ेद कुर्ता,कबरिणी-डबरिणी फतुगी अर कांधी मा लाल गमछा पंडजी पर खूब खिल्दु छौ.कपाल मा लगीं चन्दन की लाल-पीली पिठे त ‘सून मा सुहागा’.खानदानी पंडित का साथ, इलाका का नामी-गिरामी मन्खी.कर्मकांडी होणा का कारण जात-पात को कुछ जादा ही ख्याल करदा छाया.उंकी अपणी एक अलग फर्शी छै.वै पर तम्बाकू कै हैंका तै नि खाणि दीन्दा …
May
26
पाणि बोगी माटू बोगी
पाणि बोगी माटू बोगी ,बोगिगे मन्खी दिदा. डालि -बूटी बि नि राली ,तब क्य होलू हे दिदा. गौं-गल्या सुनपट ह्वैगीं,छनुड़ी रीति हे दिदा. डांडी-कांठी खरड़ी होलि,तब क्य होलू हे दिदा. छोड़-तीरों पानौ घास ,पुन्गड़ी रुखड़ी हे दिदा. सारी हर्बी बांजी होलि,तब क्य होलू हे दिदा. बल्द-भैंसी,गौड़ी ढांगी,हड्गी दिखेणी हे दिदा. ऐकि ली जालो कसाई,ठेला भरिकै …



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