काम छु कठिन पर नामुमकिन नहैं …आओ मिलाओ हाथ, सब भै-बैण.. तुम लै भागीदार बनो, बनुहू उत्तराखंड राजधानी गैरसैण…. ठान एछौ मन में आज.. पुर करण-क सबुक स्वैण… टाळ हैलो बहुत दिनां बे…अब बनानू उत्तराखंड-क राजधानी गैरसैण.. राजनितिक दल, राजनेता, फौंक्बाज़ बस कन्नै रैंल, स्वैण छु हमौर..पै सच करूहूँ और को जैंल… काम छु …

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